शराब में पड़ी बर्फ सी

शराब में पड़ी बर्फ सी
घुली है तेरी यादें
बूंद-बूंद कर नसों में उतर जाने दे

हाथ छोड़ दे ए कादिर
आज प्याले को होठों से लगाने दे

मुलाकात होगी उस-से
उसकी मुझसे
यह पता नहीं
यह शाम और जाम तो मेरे अपने हैं
ऐसा मैं मानता हूं

इन्हें मुझसे प्यार है
या नहीं
बस एक बार दिल में उतर कर उगलवाने दे

सदियों इस जाम को हाथ में लेकर रोया हूं
इस शाम को साया बना तन्हाई में इसके आंचल में सोया हूं

इन्हें सच में मुझसे ऐतबार है
या यह मेरा एक तरफा प्यार है इन्हें खुद केहलवाने दे
हाथ छोड़ दे ऐ मुसाफिर आज एक दफा फिर नशे में डूब जाने दे

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