I miss you Dadda 😔

तब अरमान बहुत बड़े थे मेरे
और उन्हें बस
मेरे लिए जीना आता था

मैं फिर भी उनकी इस कंजूसी को
उनकी खुदगर्जी बताता था
ढीला सा शर्ट पैंट बदन पर
पैरों में चप्पल मामूली सी
मेरे लिए बड़े सपने आंखों में
ओर मुस्कराहट हमेशा रहती थी प्यारी सी

उनका दिल तो बस मुझको चाहता था
दिल मेरा खुदगर्ज यह तब क्यों नहीं समझ पाता था
अब मखमली बिस्तर है सोने को और कपड़े में पहनूँ आज आलीशान
पर तू कहां है मेरे पीछे
में खो रहा हूं अपनी पहचान जिम्मेदारी क्या है
मुझे समझ नहीं आता है
पापा आज भी देखते हो क्या वहां से मुझे??
तेरा बेटा आज भी चैन से सो नहीं पाता है

आपका बेटा निमिष 😞

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