“इत्तफाक”

One of the best one of mine..Nimish

NSP GoStranger

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साफ है या
कोई इत्तफाक है
नजर में एक धुँधली सी आस है
हवा है
या कहर कहूँ
समसान है
आज यहाँ बियावान है
हर किसी का खींच रहा ध्यान है
आने कि कोशिश कर रहा है तू
जहाँ मिट्टी भी अब समसान की राख है
जिगर है
अगर तू फौलाद है
भिड़ जा इस बियावान से
पर एेसी क्या हवा चली
पैर तक हिला दिया
एेक गहरे धुँध में मेरी पहचान को गुमा दिया
तू यार है
अगर ढूँढ रहा प्यार है
लौट जा
यहाँ चारों ओर फैला
नफरतों का अंधकार है
खींच लेगी तुझे यहाँ कि रौनक अपनी आगोश में
पर संभलना क्योंकि यहाँ सिफृ मतलब के लिए प्यार है
आज तुझसे प्यार है क्योंकि तू सह रहा
उसकि नजाकतों के बार है
होना न खफा
होना न जुदा
वरना उनके लिए तू बस बेकार है

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