Statue( Unbreakable) 

यह कहानी इक मूर्तीकार ओर उसकी इक अनोखी मूर्ती की है. ….

में हूँ वो मूर्ती

भगवान ने मुझे पत्थर बना इस धरती पर भेजा कहीं पड़ा था में किसी अनजान सी गुफा में..

उसने मुझे देखा !!ले आया अपने घर

मे कुरुप था !!इक रूप दिया

कल तक अनजान था !!आज महसूस होता था मुझमें भी इक जान है..

सुबह मुझे तरासता फिर भेज देता भरे संसार में अकेले,, लोग देखते बाहबाही करते

में खुश होता ,जीवन सार्थक था मेरा..

मुझे चूमता ओर कहता तू सबसे सुंदर क्रर्ती है मेरी

अचानक इक काल आया समा गया वो मूर्तीकार उसकी आगोश में!!

में पत्थर की मूर्त था.

देखता रहा बस..

आंसू थे नहीं..

पर आज भी हूँ खड़ा अपने पैरों पर क्योंकि सबसे सुंदर क्रर्ती हूँ में उसकी!!
हाँ में पुत्र हूँ उसका ओर वो पिता थे मेरे…

I love you Dad,come wherever you are ,without you every success is equal to nothing……NSP son of AKP…

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5 thoughts on “Statue( Unbreakable) 

      • Oh, am sorry for the loss. 😕
        Don’t just say that. Unke rehte jo bhi aap karte wo unhe khushi deta, lekin unki absence mein aap jo bhi kroge wo unhe sukoon dega. Keep working and keep going so that he rest in peace. Khushi se zada sukoon matter karta hai..hai na?
        Just be with your family and remain strong.

        Liked by 1 person

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