पुरानी किताब-I

 


में निमिष परिहार दुनिया की हर इक किताब पढ़ लेना चाहता हूँ,,, 

हर पन्ना इक अनछुयी कहानी के पहलू को उजागर करते चला जाता है

बस धैर्य आपमें होना चाहिये कि कहानी पूरी कर सोना है या अगली सुबह का इंतजार करना है

में अपनी नौकरी से पस्त था ,थक हार कर घर लौटा,बीबी अवाज लगा रही थी –

“सुनो पानी गर्म कर दिया है हाथ मुँह धो लो फिर टेबल पर आ जाना खाना लगा दूँगी”

में कुछ पल सुकून चाहता था,, में अपनी जिंदगी से बहुत परेशान था ,जिंदगी हारने का मन करता था

तभी में जा पहुँचा इक बंद कमरे में जो सदियों से बंद था ,,में खुद को खत्म कर लेना चाहता था!!!! रस्सी थी, सुनसान जगह थी,रात के ११ बज रहे थे!! ! में कुर्सी धूँध रहा था ताकि पंखे से लटक कर जिंदगी खत्म कर लूँ. 

तभी मेरी नजर कुर्सी के नीचे पड़ी इक किताब पर पड़ी!! ! Tilte था “You are Still Alive”

में खुद को रोक नहीं पाया उसे पढ़ने से बहुत ही पुरानी किताब लगती थी! ! लिखायी धुँधला सी गयी थी!!! पर किसी बड़ें साहित्यकार कि किताब लगती थी!!!! जब पहला पन्ना खोला तो मेरी आँखों ने कुछ ऐसा देखा जो अकल्पनीय था –

यह किताब मेरे पिताजी ने लिखी थी ओर इक जमाने की बहुत ही मशहूर किताब थी!!!! उन्होंने यह किताब जब लिखी थी ,, जब वो मेरी ही तरह अपनी जिंदगी से परेशान हो चुके थे!!!

इक ही इक तरह की जिंदगी आपको मौत के दरवाजे तक ले जाती है पर जो उसमें भी रोमांच धूँध ले वही तो इंसान कहलाता है..

में उस किताब को पढ़ने ही जा रहा था कि उधर से बीबी की आवाज आयी जल्दी आ जायो ,क्या मुझसे उपवास करवाने का इरादा है,पेट में चूहे कूद रहे हैं

में बाहर आ गया,,, खाना खाया,, में उस किताब को पूरा पढ़ लेना चाहता था पर इस पगली को मेरे बिना नींद कहाँ आती है!! में सो गया इक नयी सुबह की इंतजार में

“” “सवाल हैं इस दिल में बेहिसाब

फिर क्यों है अनछुयी है यह किताब”””

Good Night… Waiting for morning like you only 

#NSP

Advertisements

4 thoughts on “पुरानी किताब-I

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s