Painting :I can feel your Pain 

Morning walk is good for health, it’s my daily routine! ! 

But,, morning of 7th June 2017 was something special for me! 

I woke up at 5AM and started walking from Whitefield (Bangalore) to Marathahalli.. 

Suddenly I stopped,, because in mid of my way, found one man, who was looking to a dustbin  continuesly !!! 

He was talking with himself, one pleasing smile was on his face, one hand was on his chest, like his heart started pumping today itself. . 

I was curious to know, why he was behaving like this, I went towards the dustbin and found that there was one painting,,started looking to that painting, it was normal but painter drawn waves on this

After 5-10 minutes,, I felt that those waves were touching to my face,,, so,, closed my eyes and touched that painting,, it was an awesome feeling!!!! 

Those waves were telling to me that one wave also is inside you,, make a oceans of happiness and spread in this world, make them happy who are having pain in their life..! ! ! 

 Opened my eyes and shared my feelings with that poor guy, he started crying and said, I am the creator of this painting! !! I  do not have money, my family is not able to have food on daily basis, yesterday I was alone, this wave was inside me!!  So, ,  drawn on a paper!!!! 

One lesson I taught today that if you are carrying pain in your heart then you will be able to find your qualities

Hindi Version 


​हर दिन की तरह ही आज भी में,, निमिष परिहार सुबह morning walk पर निकला था

 तभी रास्ते में मेरी नजर इक आदमी पर पड़ी वो लगातार कूड़ेदान की ओर देखा जा रहा था ,, मन ही मन कुछ बड़ बड़ाये जा रहा था चेहरे पर मीठी सी हंसी थी ओर दिल को सहलाये जा रहा था जैसे आज पहली बार उसके दिल ने धड़कना शुरू किया हो..

मुझसे रहा नहीं गया में रूका ओर वहाँ गया तो पाया उस कचरे में इक पेंटिंग थी मैंने भी उस पेंटिंग की तरफ देखना शुरु कर दिया देखने में तो बहुत ही मामूली सी थी पर जब मैंने भी एक टक उसे देखना शुरु किया तो पाया कि कलाकार ने उस पेंटिंग में कुछ लहरें बनाई हुई थी..

 अचानक मुझे महसूस हुआ कि जैसे वो लहरे मेरे चेहरे को छू रही हो तब मैंने अपनी आंखे बंद कर ली ओर उस पेंटिंग को अपने हाथों से छुआ और उन लहरों को महसूस किया एक अलग सा एहसास था जैसे मेरे अंदर कोई लहर चल रही हो और बस यह कह रही हो बस यही वक्त है जब तू अपने अंदर की लहर को बढ़ाकर दुनिया में खुशियों की सुनामी ला सकता है

 तभी मैंने अपनी आंखें खोली और अपने अंदर के ऐहसास को उस आदमी को बताना सुरू कर दिया उस आदमी ने अचानक रोना सुरू कर दिया और बोला-

 मैंने ही इस पेंटिंग को बनाया है और मेरे पास मेरी फैमिली का पेट भरने के लिए पैसे नहीं है कल जब मैं तन्हा था मेरे पास कोई तरीका नहीं था अपनी फैमिली का पेट भरने के लिए और मेरे अंदर जो लहर उमड़ रही थी मैंने वहीं लहर इस चलचित्र में उतार दी तब मुझे समझ आया कि अक्सर दर्द में ही इंसान अपने अंदर का हुनर पहचान पाता है मैंने तुरंत उस पेंटिंग को खरीद लिया ओर वह जाकर अपने बेडरुम में लगा दी आज भी मैं जब सुबह उठता हूं तो इस पेंटिंग को महसूस करता हूं और अपने काम पर निकल जाता हूँ..

Nimish Singh Parihar (NSPGoStranger) 

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