इंसान

अनकहे रिशते 

बनाता चला जाता है !!!

अपनी ही कही बात

झुठलाता चला जाता है !!!

यह कोई नयी बात नहीं 

”इंसान है”

तेरे गम में हँसता !!

ओर अपने गम में कोना पकड़ 

रोता चला जाता है!!!!


उजाले से खुद को दूर कर लेता,,

फिर आईने में शक्ल ,,,हजारों दफा वो देख लेता

उसके चेहरे की झुर्रियॉ  भी अब मेक-अप की दिवानी हो चली

ओर इक दिल हुआ करता था उस पर कभी!!

पर न जाने क्यों 

‘उस पर वो पत्थर –

बहुत से पत्थर’

 अब

रखता चला जाता है !!


इक शक्ल दिखी 

कुछ तो अनजान थी

पर खुशी का माहोल था

तो उसके जिस्म की मोजूदगी भी तुझे रास आ गयी

ओर न जाने कैसे मेरी खुशी की वो वजह 

कल न्यूज में नापाक नजर आ गयी!!

क्योंकि अच्छाई देखना इसे रास नहीं आता

यह इंसान है प्यारे 

मुर्दों पर खड़े हो दहाड़ लगाने को 

मर्दांनगी!!!!

हर वक्त वो बतलाता


Credit :Nimish Singh Parihar 

बँदर की नसल है

सुबह उठा फिर इक बंदर !!! 

समझे खुद को सिकंदर,,

बस इक रट लागी,, इसकी जिबहा को

जीत लूँ पूरी दुनिया छँड़ भर के अंदर



कदम जमीं पर न थे उसके

नींद अधूरी ले,,

सपनों में पूरा हो ,

वो ,,,,मारे दम से लटके झटके




इक डाल कभी ,,

तो दूजी डाल पर यह उछले..

कान यह खींचे ,

नाक मरोड़े,

आँखों से मदहोश है,,

सबको यह कर डाले !!!



इक जिद पकड़ ली ,,उसके दिल ने

कि ,,रोना न   !!

जब यह कम्बख्त हालात रोने को तुझसे बोले

कदम रखना तू ,,,होले होले

बन जा खुद में इक दरिया 

मार ले डुबकी ,,

बस अब ,,.पापों को धोले



पैदायिश बंदर की मेरी ,,

यह तो बस इक नसल है

तू बोला बंदर है ,,

पक्का यह तो कम अक्ल है !!!


” चल हम सौदा करते हैं”


तू इस डाल से उस डाल,,

 इक छलाँग लगा दे

जमीं मेंरे नाम करे क्या ,,पूरा पेड़ तेरा है

जहाँ चाहे वहाँ तू ,,.अपना घर बना ले